एक अज्ञात उड़ान वस्तु (यूएफओ), या अज्ञात विषम घटना (यूएपी), कोई भी कथित हवाई, जलमग्न या ट्रांसमीडियम घटना है जिसे तुरंत पहचाना या समझाया नहीं जा सकता है। जांच करने पर, अधिकांश यूएफओ की पहचान ज्ञात वस्तुओं या वायुमंडलीय घटनाओं के रूप में की जाती है, जबकि कुछ संख्या अस्पष्ट रहती है।
दूसरे ग्रहो पर जीवन की खोज हमेशा से विज्ञान केलिए रहस्यमयी और चुनौतीपूर्ण रही है| वैज्ञानिक यह पता लगाने में जुटे है की क्या वाकई एलियंस हमारे गृह पर आते है |
और अगर आते है, तो वे कहा छुपाते है? भारत में भी कई ऐसी जगहों के बारे में जानकारी सामने आई है, जहा एलियंस के होने के संकेत मिले है| इन घटनाओ को कई लोगो ने देखा और दर्ज भी किया है| वैज्ञानिक अब इन रहस्यमयी घटनाओ की तह तक जाने काप्रयास कर रहे है|
हिमालय की चोटिया हो या दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर, हर जगह एलियंस के होने की कहानी ने शोधकर्ताओ का ध्यान खींचा है | वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगो ने भी एलियंस से जुडी घटनाओ केअनुभव साझा किए है | हिमालय से लेकर नर्मदा जाती तक और महाबलीपुरम से द्रारिका तक, भारत की कई जगहे एलियंस और UFOs के दावों से जुडी रही है |
पेंटागन यूएफओ वीडियो 2004, 2014 और 2015 में विमान वाहक पोत यूएसएस निमित्ज़ और यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट पर स्थित यूनाइटेड स्टेट्स नेवी फाइटर जेट्स के फॉरवर्ड-लुकिंग इंफ्रारेड (एफएलआईआर) टारगेटिंग कैमरों की चुनिंदा दृश्य रिकॉर्डिंग हैं, जिनमें 2019 में अन्य नौसेना कर्मियों द्वारा लिए गए अतिरिक्त फुटेज शामिल हैं। चार दानेदार, मोनोक्रोमिक वीडियो, जिन्हें व्यापक रूप से आधिकारिक तौर पर यूएफओ का दस्तावेजीकरण करने के रूप में जाना जाता है, को 2017 से मीडिया में व्यापक कवरेज मिला है। पेंटागन ने बाद में 2020 में अज्ञात हवाई घटना (यूएपी) के पहले तीन वीडियो को संबोधित किया और आधिकारिक तौर पर जारी किया, और 2021 में दिए गए दो बयानों में लीक हुए 2019 वीडियो के सिद्ध होने की पुष्टि की। [यूएपी के फुटेज भी 2023 में जारी किए गए, जिन्हें एमक्यू-9 सैन्य ड्रोन से प्राप्त किया गया था। वीडियो के इर्द-गिर्द प्रचार ने कई स्पष्टीकरणों को जन्म दिया है, जिसमें ड्रोन या अज्ञात स्थलीय विमान, असामान्य या कृत्रिम उपकरण रीडिंग, भौतिक अवलोकन संबंधी घटनाएँ (जैसे, लंबन), मानव अवलोकन और व्याख्यात्मक त्रुटि, और, जैसा कि ऐसी घटनाओं के संदर्भ में विशिष्ट है, विदेशी अंतरिक्ष यान की असाधारण अटकलें शामिल हैं।
हिमालय में UFO और एलियंस
हिमालय को एलियंस का छुपाने का संभावित स्थान माना गया है | २०१०मे लद्दाख क्षेत्र में भारतीय सेना और आईटीबीपी ने UFO देखे जाने की रिपोर्ट दी थी | २०११ में एक जवान ने दावा किया की उसने ३ फ़ीट लम्बे जीवो को छह पैर और चार आँखे थी | वे जवान के पास आए और 'जॉर्ज ग्रह' का रास्ता पूछते हुए दिखे| उस क्षेत्र में UFO से जुडी कई घटनाए आज भी रहस्य बनी हुई है |
ओडिशा में UFO
१९४७मे ओडिशा के नयागढ़ जिले में एक UFO देखे जाने की घटना को एक कलाकार पचानन महरना ने ताड़पत्र पर दर्ज किया | उन्होंने उड़नतश्तरी और एलियंस के चित्र भी बनाए | यह घटना भारत की स्वतंत्रता से कुछ महीने पहले की है | ऐसा कहा अमेरिका इसे छिपाने की कोशश की थी |
डायनासोर के साथ एलियंस
मध्य प्रदेश की नर्मदा घाटी को प्राचीन सभ्यताओं का घर माना जाता है | रायसेन जिले में मिले शैलचित्रो में उडानाश्तरी और एलियंस जैसी आकृतियाँ उकेरी गई है | वैज्ञानिकों का मानना है की यहाँ आदिमानव ने एलियंस को देखकर उनकी आकृतियाँ बनाई थी |
छत्तीसगढ़ कीगुफाओ में १० हजार साल पुराना रहस्य
बस्तर जिले की गुफाओ में १० हजार साल पुराने शैलचित्रो में उडनतश्तरी और एलियंस के चित्र पाए गए है | विज्ञानिको का कहना है की इन चित्रों से पता चलता है की उस तकनीकी रूप काफी आगे थे |
एलियंस का अंडरग्राउंड शहर
महाराष्ट्र की एलोरा गुफाओ एलियंस का अड्डा कहा जाता है | माना जाता है की यहाँ एक भूमिगत शहर बनाया गया था | जहा एलियंस रहते थे | कैलाश मंदिर को बनाया गया बताया जाता है | क्योकि इसे बनाने की ताकनिक आजा भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य है |
महाबलीपुरम का रॉकेट नुमा मंदिर
केरल के महाबलीपुरम में एक प्राचीन गणेश मंदिर है, जिसका शिखर रॉकेट की आकृति | यहाँ रेडिओधर्मी पदार्थ पाए गए है, जिससे यह अंदाजा लगाया जाता है की यह स्थान रॉकेट लॉन्चिंग केलिए था |
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